“26 नवंबर 1947 को पेश आजाद भारत के पहले अंतरिम बजट में कुल खर्च 197.29 करोड़ रुपये अनुमानित था, जबकि राजस्व 171.15 करोड़ रुपये। विभाजन की त्रासदी और संसाधनों की कमी के बावजूद दामोदर वैली, हिराकुड और भाखड़ा जैसे तीन बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को मंजूरी देकर विकास की मजबूत नींव रखी गई।”
आजाद भारत का पहला बजट: सीमित संसाधनों में बड़ी उपलब्धियां
26 नवंबर 1947 को तत्कालीन वित्त मंत्री सर आर.के. शनमुखम चेट्टी ने स्वतंत्र भारत का पहला अंतरिम बजट पेश किया। यह बजट 15 अगस्त 1947 से 31 मार्च 1948 तक के साढ़े सात महीनों के लिए था। विभाजन के बाद देश दंगों, विस्थापन और आर्थिक अस्थिरता से जूझ रहा था। अंग्रेजों ने खजाना लगभग खाली छोड़ दिया था।
कुल राजस्व अनुमान 171.15 करोड़ रुपये रखा गया, जबकि व्यय 197.29 करोड़ रुपये (कुछ स्रोतों में 197.39 करोड़) अनुमानित था। इससे राजकोषीय घाटा 24.59 करोड़ रुपये (या 26.24 करोड़) का हुआ। रक्षा पर सबसे बड़ा हिस्सा 92.74 करोड़ रुपये (कुल व्यय का करीब 47%) गया, क्योंकि नई सीमाओं की सुरक्षा सबसे बड़ी चुनौती थी।
सिविल व्यय में शरणार्थी राहत, पुनर्वास और खाद्य सब्सिडी पर भारी जोर दिया गया। खाद्यान्न संकट गंभीर था। 1944-47 के बीच 43.8 लाख टन अनाज आयात पर 127 करोड़ रुपये खर्च हो चुके थे। सितंबर 1947 तक अतिरिक्त 10.62 लाख टन आयात की जरूरत पड़ी।
तीन प्रमुख परियोजनाओं को मंजूरी
सीमित संसाधनों के बावजूद बजट में विकास कार्यों को प्राथमिकता दी गई। तीन बड़ी परियोजनाओं को मंजूरी मिली, जो आज भी भारत की जल-विद्युत और सिंचाई क्रांति का आधार हैं:
दामोदर वैली अथॉरिटी (DVC) : कोयला क्षेत्र में बिजली उत्पादन, बाढ़ नियंत्रण और सिंचाई के लिए प्रमुख योजना। इसमें 2 करोड़ रुपये का लोन आवंटित किया गया।
हिराकुड डैम (ओडिशा): महानदी पर दुनिया के सबसे लंबे मिट्टी के बांधों में से एक। बाढ़ रोकथाम और सिंचाई के लिए महत्वपूर्ण।
भाखड़ा डैम (पूर्वी पंजाब, अब हिमाचल प्रदेश/पंजाब): सतलुज नदी पर बहुउद्देशीय परियोजना। बिजली, सिंचाई और बाढ़ नियंत्रण के लिए आधारभूत कदम।
ये परियोजनाएं विभाजन के बाद की चुनौतियों में भी दूरदर्शिता दिखाती हैं। विकास बजट को संशोधित कर प्रांतों को अनुदान और ऋण दिए गए। इनसे भारत की औद्योगिक और कृषि प्रगति की शुरुआत हुई।
आज जब बजट लाखों करोड़ का है, तब 197 करोड़ के उस पहले बजट की सादगी और दूरदर्शिता याद दिलाती है कि मजबूत इच्छाशक्ति से छोटे संसाधनों में भी बड़ा बदलाव संभव है।
Disclaimer: यह एक समाचार आलेख है। इसमें वर्णित आंकड़े ऐतिहासिक रिकॉर्ड पर आधारित हैं।