“रिलायंस इंडस्ट्रीज ने ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट को सिरे से खारिज कर दिया, जिसमें कंपनी के लिथियम-आयन बैटरी सेल मैन्युफैक्चरिंग प्लान्स को रुकने का दावा किया गया था। कंपनी ने स्पष्ट किया कि सभी प्रोजेक्ट्स तय समय पर चल रहे हैं और गिगाफैक्ट्री 2026 में ऑपरेशनल हो जाएगी, जबकि चाइनीज टेक कंपनियों से बातचीत विफल होने के बावजूद वैकल्पिक रणनीतियां अपनाई जा रही हैं।”
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट में दावा किया गया कि रिलायंस इंडस्ट्रीज ने लिथियम-आयन बैटरी सेल प्रोडक्शन को रोक दिया है, क्योंकि चाइनीज फर्म्स से टेक्नोलॉजी ट्रांसफर की डील फेल हो गई। रिपोर्ट के मुताबिक, चीन की एक्सपोर्ट कंट्रोल पॉलिसी ने इस प्रक्रिया को बाधित किया, जिससे कंपनी को बड़ा झटका लगा।
रिलायंस के प्रवक्ता ने इस रिपोर्ट को पूरी तरह गलत बताते हुए कहा कि रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर में कोई बदलाव नहीं आया है। कंपनी की बैटरी स्टोरेज मैन्युफैक्चरिंग योजनाएं तय टाइमलाइन पर आगे बढ़ रही हैं, और जामनगर में प्रस्तावित गिगाफैक्ट्री का काम तेजी से चल रहा है।
मुकेश अंबानी ने शेयरहोल्डर्स मीटिंग में पहले ही घोषणा की थी कि बैटरी गिगाफैक्ट्री 2026 में उत्पादन शुरू कर देगी, जो 50 GWh की क्षमता से शुरू होगी और बाद में 100 GWh तक विस्तारित होगी। कंपनी अब घरेलू और अंतरराष्ट्रीय पार्टनर्स के साथ नई टेक्नोलॉजी सॉल्यूशंस पर फोकस कर रही है, ताकि चीन पर निर्भरता कम हो।
रिलायंस की रणनीति में बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) असेंबली पर जोर दिया जा रहा है, जो EV और रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर को सपोर्ट करेगा। कंपनी ने 2030 तक 100 GW रिन्यूएबल एनर्जी टारगेट रखा है, जिसमें बैटरी बिजनेस की भूमिका अहम है।
बैटरी बिजनेस की प्रमुख चुनौतियां और रिलायंस की रणनीति:
टेक्नोलॉजी एक्सेस: चाइनीज फर्म्स से डील फेल होने के बाद, रिलायंस अमेरिकी और यूरोपीय कंपनियों से बातचीत कर रही है, जो लिथियम-फॉस्फेट और सॉलिड-स्टेट बैटरी टेक पर फोकस करेंगी।
कॉस्ट रिडक्शन: कंपनी का लक्ष्य बैटरी प्रोडक्शन कॉस्ट को 40% तक कम करना है, जो भारत में EV एडॉप्शन को बढ़ावा देगा।
मार्केट इंपैक्ट: 2026 में शुरू होने वाली गिगाफैक्ट्री से 10,000 से ज्यादा जॉब्स क्रिएट होंगी, और भारत की बैटरी इंपोर्ट डिपेंडेंसी 30% घटेगी।
| सेक्टर | रिलायंस का निवेश (अनुमानित, करोड़ रुपये में) | अपेक्षित आउटपुट (2026 तक) |
|---|---|---|
| बैटरी सेल मैन्युफैक्चरिंग | 75,000 | 50 GWh क्षमता |
| BESS असेंबली | 20,000 | 10 GW स्टोरेज |
| EV इंटीग्रेशन | 15,000 | 5 मिलियन यूनिट्स सपोर्ट |
रिलायंस ने स्पष्ट किया कि कोई भी रिपोर्ट जो प्रोजेक्ट पॉज की बात करती है, वह भ्रामक है, और कंपनी की कमिटमेंट ग्रीन एनर्जी ट्रांजिशन पर मजबूत बनी हुई है। मुकेश अंबानी की लीडरशिप में, रिलायंस अब इंडिपेंडेंट इनोवेशन पर फोकस कर रही है, जो भारत को ग्लोबल बैटरी हब बनाने में मदद करेगी।
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