ट्रंप टैरिफ पर भारत का पलटवार, अमेरिकी दालों पर जड़ा 30% शुल्क; बढ़ी ट्रेड वॉर की आशंका!

“भारत ने ट्रंप प्रशासन के 50% टैरिफ के जवाब में अमेरिकी दालों पर 30% आयात शुल्क लगा दिया, जिससे अमेरिकी किसानों को नुकसान की आशंका बढ़ी और दोनों देशों के बीच व्यापार युद्ध गहराने की संभावना मजबूत हुई।”

भारत सरकार ने अमेरिका से आयातित दालों और फलियों पर 30 प्रतिशत आयात शुल्क लागू कर दिया, जिसमें चना, मटर, पीली मटर और अन्य प्रमुख दालें शामिल हैं। यह कदम ट्रंप प्रशासन द्वारा भारत पर लगाए गए 50 प्रतिशत टैरिफ का सीधा जवाब माना जा रहा है, जो स्टील, एल्युमिनियम और अन्य उत्पादों पर केंद्रित था।

अमेरिकी सीनेटरों ने राष्ट्रपति ट्रंप को पत्र लिखकर इस शुल्क को हटाने की मांग की, क्योंकि भारत दालों का दुनिया का सबसे बड़ा आयातक है और इस फैसले से अमेरिकी कृषि राज्यों जैसे नॉर्थ डकोटा और मोंटाना के किसानों की आय पर 20-25 प्रतिशत तक असर पड़ सकता है। अमेरिका से भारत को दालों का निर्यात सालाना 1 अरब डॉलर से अधिक का है, जिसमें से 40 प्रतिशत हिस्सा पीली मटर का होता है।

इस पलटवार से द्विपक्षीय व्यापार समझौते की बातचीत रुक सकती है, जहां भारत डेटा लोकलाइजेशन और आईपी राइट्स पर अपनी शर्तें मजबूत कर रहा है। ट्रंप ने भारत को ‘महाराजा टैरिफ’ वाला देश करार दिया था, लेकिन अब अमेरिकी कृषि लॉबी दबाव बना रही है कि ट्रेड डील में दालों को प्राथमिकता दी जाए।

प्रभावित उत्पादों की सूची और अनुमानित असर

उत्पादपहले का शुल्क (%)नया शुल्क (%)अनुमानित वार्षिक नुकसान (अमेरिकी डॉलर में)प्रमुख अमेरिकी उत्पादक राज्य
चना (Chickpeas)1030300 मिलियनमोंटाना
पीली मटर (Yellow Peas)030400 मिलियननॉर्थ डकोटा
मटर (Lentils)530250 मिलियनवाशिंगटन
अन्य फलियां5-1030150 मिलियनविभिन्न

इस टेबल से साफ है कि शुल्क बढ़ोतरी से अमेरिकी निर्यात में 20 प्रतिशत तक गिरावट आ सकती है, जबकि भारत घरेलू किसानों को बढ़ावा देने के लिए स्थानीय उत्पादन पर फोकस कर रहा है।

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प्रमुख बिंदु: व्यापार युद्ध की आशंका क्यों बढ़ी?

अमेरिकी दबाव : ट्रंप प्रशासन ने भारत के खिलाफ 500 प्रतिशत तक टैरिफ की धमकी दी थी, लेकिन दाल शुल्क ने अमेरिकी घरेलू राजनीति में हलचल मचा दी।

भारतीय रणनीति : भारत ने चुपचाप यह कदम उठाया, जो ईयू और चीन जैसे अन्य देशों को प्रेरित कर सकता है कि वे भी जवाबी कार्रवाई करें।

आर्थिक प्रभाव : वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित होगी, जहां भारत दालों की कमी पूरी करने के लिए कनाडा और ऑस्ट्रेलिया की ओर रुख कर सकता है, जिससे अमेरिकी बाजार हिस्सेदारी घटेगी।

वार्ता की संभावना : दोनों देशों के बीच ट्रेड डील में कृषि उत्पादों को शामिल करने पर जोर बढ़ेगा, लेकिन भारत अपनी ऊर्जा और टेक सेक्टर की रक्षा करेगा।

यह फैसला वैश्विक व्यापार में नई गतिशीलता ला सकता है, जहां छोटे उत्पाद बड़े टकराव का कारण बन रहे हैं।

Disclaimer: यह रिपोर्ट सूत्रों पर आधारित समाचार है और किसी प्रकार की निवेश सलाह या टिप्स नहीं है।

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