दुनिया का ‘ऑटो हब’ बनेगा भारत! विदेशी कंपनियां अमेरिका-यूरोप छोड़ भारत की ओर, जानिए क्या है नई रणनीति

भारत तेजी से वैश्विक ऑटोमोबाइल हब बन रहा है। EU और US के साथ हालिया ट्रेड डील्स से आयात शुल्क में कटौती हो रही है, जिससे यूरोपीय और अमेरिकी कंपनियां भारत में निवेश बढ़ा रही हैं। जापानी, कोरियाई और यूरोपीय ऑटो दिग्गज जैसे Suzuki, Hyundai, Volkswagen, Toyota और Honda भारत को चीन से विकल्प के रूप में देख रहे हैं। 2026 में भारत की ऑटो सेक्टर ग्रोथ 7-8% रहने की उम्मीद है, जबकि EV सेगमेंट में निवेश ₹2.23 लाख करोड़ पहुंच चुका है। यह बदलाव भारत को दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा ऑटो मार्केट से आगे मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपोर्ट हब बनाने की दिशा में है।

दुनिया का ‘ऑटो हब’ बनेगा भारत! विदेशी कंपनियां अमेरिका-यूरोप छोड़ भारत की ओर

भारत वैश्विक ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री में नया केंद्र बनने की ओर तेजी से बढ़ रहा है। हाल के वर्षों में अमेरिका और यूरोप में बिक्री धीमी पड़ने, भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं और चीन पर निर्भरता कम करने की रणनीति से कई विदेशी कंपनियां भारत की ओर रुख कर रही हैं। भारत अब दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा ऑटो मार्केट है, जहां ग्रोथ की अपार संभावनाएं हैं।

ट्रेड डील्स से बड़ा बदलाव EU के साथ FTA (जनवरी 2026 में साइन) से कारों पर भारत का आयात शुल्क 110% से घटकर चरणबद्ध तरीके से 10% तक आएगा। इससे Volkswagen, Renault, Mercedes-Benz जैसी यूरोपीय कंपनियां भारत में ज्यादा निवेश और लोकल प्रोडक्शन बढ़ा रही हैं। US के साथ अंतरिम ट्रेड फ्रेमवर्क से भी टैरिफ कम हो रहे हैं, जो भारतीय एक्सपोर्ट्स को फायदा देगा। इन डील्स से भारत EU और US मार्केट्स (कुल 25 मिलियन कार सालाना) तक ड्यूटी-फ्री या कम ड्यूटी एक्सेस पा रहा है।

See also  ₹6.25 लाख में 33 किमी माइलेज वाली कार क्यों बनी नंबर-1? दिसंबर में 19,000 यूनिट्स बिकीं, न चूकें ये डिटेल्स!

विदेशी कंपनियों के बड़े निवेश

Hyundai Motor Group : 2030 तक भारत में $5 बिलियन (लगभग ₹42,000 करोड़) निवेश की योजना। 26 नए मॉडल लॉन्च करेंगे, जिसमें 5 EV और 8 हाइब्रिड SUV शामिल। भारत को US के बाद दूसरा सबसे महत्वपूर्ण मार्केट मान रहे हैं। प्रोडक्शन कैपेसिटी 1.4 मिलियन यूनिट सालाना तक बढ़ाएंगे।

Suzuki Motor Corp : FY में प्रोडक्शन टारगेट 3.52 मिलियन यूनिट तक बढ़ाया, भारत सबसे बड़ा मार्केट।

Volkswagen Group और Renault : भारत को एक्सपोर्ट हब के रूप में देख रहे हैं, लोकल प्रोडक्शन बढ़ा रहे हैं। Skoda Auto Volkswagen ₹10,000 करोड़ निवेश की योजना।

Toyota और Honda : चीन से पिवट कर भारत में फैक्टरियां और एक्सपोर्ट बढ़ा रहे हैं। Honda 2026 से मिड-साइज मोटरसाइकिल्स यूरोप में भारत से एक्सपोर्ट करेगा।

अन्य : Kia, BYD जैसी कंपनियां EV फोकस बढ़ा रही हैं, लेकिन भारतीय ब्रांड्स Tata और Mahindra EV सेगमेंट में 60% से ज्यादा शेयर रखते हैं।

EV सेक्टर में तेज ग्रोथ 2020-2025 में EV सेक्टर में ₹2.23 लाख करोड़ निवेश आया, लेकिन 2030 तक ₹12.5 लाख करोड़ की जरूरत है। 2025 तक 5.3 मिलियन EV रजिस्टर्ड, पेनेट्रेशन 8.4%। PM E-DRIVE स्कीम (₹10,900 करोड़) और PLI ACC बैटरी सेक्टर को बूस्ट दे रही है। 2030 तक 40% EV पेनेट्रेशन का टारगेट।

एक्सपोर्ट और लोकल प्रोडक्शन का फायदा भारत की कम लागत, बड़ा लेबर पूल और सरकारी इंसेंटिव्स (PLI ऑटो और कंपोनेंट्स में ₹35,657 करोड़ निवेश तक) कंपनियों को आकर्षित कर रहे हैं। 2024-25 में 31 मिलियन यूनिट प्रोडक्शन, एक्सपोर्ट 5.3 मिलियन यूनिट से ज्यादा। ऑटो कंपोनेंट्स में भी निवेश बढ़ रहा है, क्योंकि FTA से EU और US में ड्यूटी-फ्री एक्सपोर्ट संभव।

See also  MG ZS EV बेस वेरिएंट घर लाने पर 3 लाख डाउन पेमेंट के बाद कितनी होगी EMI? जानिए पूरी डिटेल

क्यों छोड़ रही हैं कंपनियां अमेरिका-यूरोप?

अमेरिका में ट्रंप टैरिफ्स और अनिश्चितता।

यूरोप में स्लो सेल्स, हाई कॉस्ट और चीन से कॉम्पिटिशन।

भारत में 7-8% GDP ग्रोथ, युवा पॉपुलेशन और EV ट्रांजिशन।

भारत के लिए अवसर यह शिफ्ट लाखों जॉब्स क्रिएट करेगा, R&D हब बनेगा और भारत को ग्लोबल वैल्यू चेन में मजबूत करेगा। 2030 तक ऑटो सेक्टर $250 बिलियन से ज्यादा का हो सकता है। कंपनियां भारत को ‘मैन्युफैक्चरिंग + एक्सपोर्ट’ बेस बना रही हैं, जहां लोकल डिमांड के साथ थर्ड कंट्री एक्सपोर्ट भी होगा।

Leave a Comment