इंडोनेशिया सरकार ने टाटा मोटर्स और महिंद्रा एंड महिंद्रा से 1,05,000 कमर्शियल वाहनों के मेगा ऑर्डर पर अस्थायी रोक लगा दी है, जो राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांटो की ‘कोपरासी मेराह पुतीह’ योजना के तहत ग्रामीण सहकारी समितियों के लिए था। स्थानीय ऑटो उद्योग और नीति निर्माताओं के विरोध के कारण यह फैसला आया, लेकिन दोनों भारतीय कंपनियों ने स्पष्ट किया है कि उन्हें कोई आधिकारिक नोटिस नहीं मिला और ऑर्डर पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा है। महिंद्रा ने कहा कि 35,000 Scorpio पिकअप की डिलीवरी इस साल होगी और एडवांस पेमेंट भी मिल चुका है।
इंडोनेशिया के सहकारी मंत्री फेरी जुलियांटोनो ने 26 फरवरी को एक स्थानीय टीवी इंटरव्यू में घोषणा की कि भारत से 1,05,000 वाहनों के आयात को फिलहाल रोक दिया गया है। यह फैसला सरकार और सांसदों के बीच बैठक के बाद लिया जाएगा। ये वाहन 4×4 पिकअप और सिक्स-व्हीलर ट्रक हैं, जो राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांटो की महत्वाकांक्षी योजना के तहत 80,000 से अधिक ग्रामीण सहकारी समितियों (कोपरासी मेराह पुतीह) को मजबूत करने के लिए इस्तेमाल होने थे।
यह ऑर्डर इंडोनेशिया की स्टेट-ओन्ड कंपनी PT Agrinas Pangan Nusantara ने दिया था, जिसकी वैल्यू करीब 24 ट्रिलियन रुपिया (लगभग 1.42 बिलियन डॉलर) बताई जा रही है। इस डील में 30% एडवांस पेमेंट भी हो चुका है। महिंद्रा को 35,000 Scorpio पिकअप ट्रक सप्लाई करने थे, जबकि टाटा मोटर्स को 35,000 4×4 पिकअप (योद्धा) और 35,000 Ultra T.7 सिक्स-व्हीलर ट्रक देने थे। यह दोनों कंपनियों के लिए अब तक का सबसे बड़ा निर्यात ऑर्डर था।
स्थानीय विरोध की मुख्य वजह इंडोनेशिया का घरेलू ऑटोमोबाइल सेक्टर है। इंडोनेशियन चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (Kadin) और इंडोनेशियन ऑटोमोटिव इंडस्ट्री एसोसिएशन (Gaikindo) ने इस आयात का कड़ा विरोध किया। उनका कहना है कि देश में सालाना 10 लाख से अधिक पिकअप ट्रक बनाने की क्षमता है, ऐसे में बड़े पैमाने पर आयात से लोकल मैन्युफैक्चरिंग, रोजगार और इंडस्ट्री प्रभावित होगी। लोकल वाहनों की कीमत आयातित मॉडल से ज्यादा होने के बावजूद (महिंद्रा का Scorpio पिकअप करीब 278 मिलियन रुपिया, जबकि लोकल मॉडल 400 मिलियन से ऊपर) नीति निर्माताओं ने ‘मेक इन इंडोनेशिया’ को प्राथमिकता देने की बात कही।
इसके अलावा, इंडोनेशिया में वाहन सेल्स में गिरावट आ रही है और लेऑफ की आशंका बढ़ गई है। ट्रेड बॉडीज ने राष्ट्रपति से अपील की कि इस योजना को रद्द किया जाए, क्योंकि इससे घरेलू अर्थव्यवस्था को ज्यादा फायदा नहीं होगा। कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया कि पहले से 1,000 से ज्यादा ट्रक की पहली खेप फरवरी के अंत में पहुंच चुकी है, लेकिन अब बाकी शिपमेंट पर रोक लग गई है।
हालांकि, दोनों भारतीय कंपनियों ने मीडिया रिपोर्ट्स पर सफाई दी है। महिंद्रा एंड महिंद्रा ने BSE फाइलिंग में कहा कि उन्हें इंडोनेशिया से ऑर्डर सस्पेंड होने की कोई आधिकारिक सूचना नहीं मिली है। कंपनी ने दोहराया कि यह उनका अब तक का सबसे बड़ा एक्सपोर्ट ऑर्डर है, जिसमें 35,000 लाइट कमर्शियल वाहन (Scorpio पिकअप) इस साल डिलीवर किए जाएंगे। एडवांस पेमेंट मिल चुका है और कोई बदलाव नहीं हुआ।
टाटा मोटर्स ने भी कहा कि उनकी इंडोनेशियन सब्सिडियरी PT Tata Motors Distribusi Indonesia को 70,000 वाहनों का ऑर्डर मिला है और कोई डिमांड या एक्जीक्यूशन रिस्क नहीं है। कंपनी ने इसे लोकल पॉलिसी डिस्कशन बताया, न कि ऑर्डर से जुड़ी समस्या। दोनों कंपनियों ने कहा कि रिपोर्ट्स से उनके बिजनेस पर कोई मटेरियल प्रभाव नहीं पड़ेगा और सप्लाई जल्द शुरू होगी।
यह घटनाक्रम भारत-इंडोनेशिया ट्रेड रिलेशंस में एक नया मोड़ ला सकता है, जहां लोकल प्रोटेक्शन और बड़े इंटरनेशनल डील्स के बीच संतुलन बनाना चुनौतीपूर्ण हो रहा है। इंडोनेशिया सरकार अब आगे की मीटिंग में इस पर अंतिम फैसला लेगी।
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