ट्रंप टैरिफ: सुप्रीम कोर्ट से करारी हार के बावजूद नहीं माने ट्रंप, भारत समेत 16 देशों पर नई जांच शुरू; मकसद क्या है?

“अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने फरवरी 2026 में ट्रंप के बड़े टैरिफ को अवैध घोषित कर दिया था, लेकिन राष्ट्रपति ट्रंप ने हार नहीं मानी। अब उन्होंने Section 301 के तहत भारत, चीन, EU समेत 16 प्रमुख व्यापारिक साझेदारों पर ‘अनफेयर ट्रेड प्रैक्टिस’ और इंडस्ट्रियल एक्सेस कैपेसिटी की जांच शुरू कर दी है। यह कदम पुराने टैरिफ की जगह नए टैरिफ लगाने की कोशिश है, जिससे अमेरिकी मैन्युफैक्चरिंग को बचाया जा सके और राजस्व की भरपाई हो। भारत के लिए यह नई चुनौती है, क्योंकि जांच से नए ड्यूटी लग सकते हैं।”

ट्रंप टैरिफ: कोर्ट में मात खाने के बाद भी नहीं मान रहे ट्रंप, भारत समेत 16 देशों के खिलाफ जांच शुरू; क्या है मकसद?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सुप्रीम कोर्ट की फरवरी 2026 की उस ऐतिहासिक फैसले के बावजूद अपनी टैरिफ नीति पर अड़े रहने का संकेत दिया है, जिसमें कोर्ट ने International Emergency Economic Powers Act (IEEPA) के तहत लगाए गए व्यापक रेसिप्रोकल टैरिफ को असंवैधानिक करार दिया था। इस फैसले से ट्रंप प्रशासन को सैकड़ों अरब डॉलर के राजस्व की भरपाई का संकट पैदा हुआ था।

अब ट्रंप प्रशासन ने नई रणनीति अपनाई है। United States Trade Representative (USTR) जेमिसन ग्रीर ने 11 मार्च 2026 को Section 301 ऑफ द ट्रेड एक्ट 1974 के तहत 16 प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं पर जांच शुरू करने की घोषणा की। इन जांचों का फोकस विदेशी देशों में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में स्ट्रक्चरल एक्सेस कैपेसिटी और प्रोडक्शन पर है, जो अमेरिकी वाणिज्य को प्रभावित कर रही है।

जांच के दायरे में शामिल 16 देश/क्षेत्र इस प्रकार हैं:

चीन

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यूरोपीय संघ (EU)

भारत

जापान

दक्षिण कोरिया

मेक्सिको

वियतनाम

थाईलैंड

इंडोनेशिया

मलेशिया

कंबोडिया

बांग्लादेश

ताइवान

सिंगापुर

स्विट्जरलैंड

नॉर्वे

ये सभी देश अमेरिका के साथ बड़े ट्रेड सरप्लस वाले हैं। उदाहरण के लिए, 2025 में चीन का अमेरिका के साथ गुड्स ट्रेड सरप्लस 295 अरब डॉलर से अधिक था, जबकि भारत का भी महत्वपूर्ण सरप्लस रहा। जांच का मुख्य उद्देश्य यह तय करना है कि इन देशों की नीतियां और प्रैक्टिसेज अनुचित या भेदभावपूर्ण हैं या नहीं, जो अमेरिकी मैन्युफैक्चरिंग को नुकसान पहुंचा रही हैं।

ट्रंप प्रशासन का कहना है कि ये जांच अमेरिकी वर्कर्स और इंडस्ट्री को बचाने के लिए जरूरी हैं। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद ट्रंप ने तुरंत Section 122 के तहत 10% ग्लोबल टैरिफ लगाया था, जिसे बाद में 15% तक बढ़ाने की योजना है। लेकिन Section 301 जांच लंबी प्रक्रिया है, जिसमें परामर्श, पब्लिक कमेंट और रिपोर्ट शामिल होती है। सफल होने पर इससे नए टैरिफ या अन्य प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं, जो इस साल गर्मियों तक लागू हो सकते हैं।

भारत के संदर्भ में यह जांच खासतौर पर महत्वपूर्ण है। भारत-अमेरिका के बीच हाल ही में ट्रेड फ्रेमवर्क पर सहमति बनी थी, जिसमें कुछ टैरिफ कम करने की बात थी। लेकिन सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद ट्रंप ने कहा था कि भारत के साथ डील में कोई बदलाव नहीं होगा और भारत को टैरिफ देने पड़ेंगे। अब Section 301 जांच से भारत के एक्सपोर्ट सेक्टर, खासकर टेक्सटाइल, फार्मा, आईटी हार्डवेयर और ऑटो पार्ट्स पर असर पड़ सकता है। अमेरिका का दावा है कि भारत में सब्सिडी और अन्य प्रैक्टिस से एक्सेस कैपेसिटी बनी है, जो अमेरिकी उत्पादों को प्रतिस्पर्धा में पीछे धकेल रही है।

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ट्रंप की यह रणनीति पिछले कार्यकाल की तरह है, जब Section 301 का इस्तेमाल चीन के खिलाफ किया गया था। अब इसे व्यापक बनाकर कई देशों पर लागू किया जा रहा है। इससे ग्लोबल ट्रेड में अनिश्चितता बढ़ गई है। कई देशों ने पहले ही अमेरिका के साथ नए डील साइन किए थे ताकि उच्च टैरिफ से बचा जा सके, लेकिन अब जांच से वे डील भी प्रभावित हो सकते हैं।

यह जांच अमेरिकी अर्थव्यवस्था में मैन्युफैक्चरिंग को मजबूत करने और ट्रेड डेफिसिट कम करने का हिस्सा है। ट्रंप प्रशासन का मानना है कि विदेशी एक्सेस कैपेसिटी से अमेरिकी फैक्टरियां बंद हो रही हैं और जॉब्स जा रही हैं। जांच पूरी होने पर USTR नई ड्यूटी या ट्रेड बैरियर सुझा सकता है।

भारत सरकार को अब इन जांचों में हिस्सा लेना होगा, सबूत पेश करने होंगे और अमेरिका के साथ डिप्लोमेटिक बातचीत तेज करनी होगी। अन्यथा नए टैरिफ से भारतीय एक्सपोर्टर्स को नुकसान हो सकता है। यह स्थिति ग्लोबल सप्लाई चेन को भी प्रभावित करेगी।

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