“वेनुजुएला में अमेरिकी सैन्य कार्रवाई से वैश्विक तेल कीमतों में उथल-पुथल, भारत-पाकिस्तान सीमा तनाव और चीन की बढ़ती आक्रामकता जैसे जोखिमों के बीच बजट 2026 में रक्षा व्यय में संभावित 10-20% वृद्धि की उम्मीद; पिछले वर्षों में रक्षा बजट ₹6.81 लाख करोड़ तक पहुंचा, लेकिन जीडीपी का मात्र 1.9% होने से चुनौतियां बरकरार।”
वेनुजुएला में हालिया अमेरिकी सैन्य हस्तक्षेप ने वैश्विक भूराजनीतिक परिदृश्य को और जटिल बना दिया है। जनवरी 2026 की शुरुआत में अमेरिका द्वारा निकोलस मादुरो को गिरफ्तार करने की कार्रवाई से तेल बाजार में अस्थिरता बढ़ी, जहां Brent crude की कीमतें 85 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गईं। यह स्थिति भारत जैसे आयात-निर्भर देशों के लिए ऊर्जा सुरक्षा को खतरे में डाल रही है, क्योंकि रूस से तेल आयात पर अमेरिकी दबाव पहले से ही बढ़ा हुआ है।
दक्षिण एशिया में भारत-पाकिस्तान सीमा पर हाल के आतंकी हमलों ने तनाव को नई ऊंचाई दी, जबकि चीन की तरफ से LAC पर सैन्य निर्माण जारी है। ब्रिक्स चेयरमैनशिप के दौरान भारत ग्लोबल साउथ को मजबूत करने की कोशिश कर रहा है, लेकिन अमेरिका-चीन व्यापार युद्ध और थाईलैंड-कंबोडिया जैसे क्षेत्रीय संघर्ष वैश्विक व्यापार को प्रभावित कर रहे हैं। ऐसे में रक्षा क्षेत्र पर फोकस बढ़ना तय माना जा रहा है।
बजट 2026 में रक्षा व्यय में वृद्धि की उम्मीदें मजबूत हैं, क्योंकि सरकार सैन्य आधुनिकीकरण को प्राथमिकता दे रही है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि रक्षा बजट 7.5-8 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है, जो पिछले वर्ष के 6.81 लाख करोड़ से 10-20% अधिक होगा। यह वृद्धि फिस्कल डेफिसिट को 4.5% पर रखने की चुनौती के बावजूद जरूरी है, क्योंकि जीडीपी का मात्र 1.9% रक्षा पर खर्च अपर्याप्त साबित हो रहा है।
भारत के रक्षा बजट का ट्रेंड (2020-2025)
| वर्ष | रक्षा बजट (लाख करोड़ रुपये में) | जीडीपी प्रतिशत | प्रमुख आवंटन |
|---|---|---|---|
| 2020 | 4.71 | 2.1 | सैलरी और पेंशन पर फोकस |
| 2021 | 4.78 | 2.0 | COVID प्रभाव से सीमित वृद्धि |
| 2022 | 5.25 | 1.9 | आधुनिकीकरण के लिए कैपिटल व्यय बढ़ा |
| 2023 | 5.94 | 1.9 | स्वदेशी हथियारों पर जोर |
| 2024 | 6.21 | 1.9 | सीमा सुरक्षा के लिए अतिरिक्त फंड |
| 2025 | 6.81 | 1.9 | रिसर्च और डेवलपमेंट में निवेश |
यह ट्रेंड दर्शाता है कि रक्षा व्यय में स्थिर वृद्धि हुई, लेकिन चीन के 200 बिलियन डॉलर बजट की तुलना में भारत का हिस्सा कम है। 2025-2029 के बीच कुल रक्षा खर्च 415.9 बिलियन डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है, जिसमें CAGR 3.7% रहेगा।
प्रमुख भूराजनीतिक जोखिम और भारत पर प्रभाव
वेनुजुएला संकट : अमेरिकी हस्तक्षेप से तेल कीमतों में 10-15% उछाल, भारत के आयात बिल को 20 बिलियन डॉलर अतिरिक्त प्रभावित कर सकता है।
भारत-पाकिस्तान तनाव : हाल के हमलों से सीमा पर सैन्य तैनाती बढ़ी, जो रक्षा संसाधनों की मांग बढ़ा रही है।
चीन की चुनौती : QUAD और अमेरिका के साथ साझेदारी मजबूत, लेकिन रूसी तेल पर निर्भरता से जटिलताएं।
अन्य वैश्विक संघर्ष : अफगानिस्तान-पाकिस्तान और भारत-बांग्लादेश सीमा मुद्दे सुरक्षा खर्च को जरूरी बनाते हैं।
बजट में रक्षा नवाचार कॉरिडोर और स्वदेशी हथियार उत्पादन पर फोकस बढ़ सकता है, जैसे Kerala की मांग के अनुसार। हालांकि, इंफ्रास्ट्रक्चर और MSME समर्थन के साथ संतुलन बनाना चुनौतीपूर्ण होगा।
Disclaimer: यह समाचार रिपोर्ट, टिप्स और स्रोतों पर आधारित है।