“रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयरों में 2026 की शुरुआत से 7% की गिरावट आई, जिससे मार्केट कैप में ₹1.4 लाख करोड़ का नुकसान हुआ; कंपनी ने जनवरी में रूसी क्रूड ऑयल की कोई डिलीवरी न लेने का फैसला किया, जो ट्रंप की तरफ से भारत को रूसी ऑयल खरीद पर चेतावनी से जुड़ा है; रिफाइनिंग बिजनेस पर असर सीमित रह सकता है, लेकिन रिटेल सेक्टर में ग्रोथ स्लो होने से निवेशक चिंतित।”
रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयरों में जनवरी 2026 की शुरुआत से ही तेज गिरावट दर्ज की गई, जो कंपनी के रूसी क्रूड ऑयल पर निर्भरता से जुड़ी चिंताओं से उपजी। कंपनी ने घोषणा की कि जनवरी में रूसी ऑयल की कोई डिलीवरी नहीं होगी, जिससे भारत के कुल रूसी ऑयल इंपोर्ट में 40% तक की कमी आ सकती है। यह फैसला अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की चेतावनी के बाद आया, जिसमें भारत को रूसी ऑयल खरीद पर हाई टैरिफ की धमकी दी गई।
शेयर प्राइस में 7% की गिरावट से मार्केट कैपिटलाइजेशन में ₹1.4 लाख करोड़ का घाटा हुआ, जो शेयरधारकों के लिए बड़ा झटका साबित हुआ। Reliance का Jamnagar रिफाइनरी, जो पहले रूसी ऑयल का बड़ा खरीदार था, अब मिडिल ईस्टर्न और वेनेजुएलन क्रूड की तरफ शिफ्ट हो रहा है। ब्रोकरेज फर्म्स जैसे Morgan Stanley और Goldman Sachs का अनुमान है कि रिफाइनिंग मार्जिन मजबूत रहेंगे, लेकिन रिटेल बिजनेस में 9-10% की ग्रोथ स्लो हो सकती है, जो डिस्क्रिशनरी स्पेंडिंग कम होने से जुड़ी।
प्रमुख पॉइंट्स:
रूसी ऑयल कट: Reliance ने Rosneft से कोई कार्गो नहीं लिया, जिससे भारत का मंथली इंपोर्ट 1 मिलियन बैरल प्रति दिन से नीचे आ सकता है।
स्टॉक परफॉर्मेंस: शेयर प्राइस ₹1,508.90 तक गिरा, जो 19 महीनों में सबसे बड़ी सिंगल-डे फॉल थी।
ब्रोकरेज व्यू: Jefferies ने Buy रेटिंग रखी, टारगेट प्राइस ₹1,830, जबकि Axis Capital ने वैल्यूएशन को आकर्षक बताया।
सेक्टर इंपैक्ट: ऑयल-टू-केमिकल्स EBITDA में 16% YoY ग्रोथ की उम्मीद, लेकिन रिटेल में GST रेशनलाइजेशन और डिमर्जर से चैलेंज।
| सेक्टर | 2025 Q4 अनुमानित ग्रोथ (YoY) | मुख्य चिंता |
|---|---|---|
| रिफाइनिंग | 16% EBITDA बढ़ोतरी | रूसी ऑयल की कमी से क्रूड डिफरेंशियल्स पर असर |
| रिटेल | 9-10% रेवेन्यू ग्रोथ | फेस्टिव टाइमिंग और कंज्यूमर प्रोडक्ट्स डिमर्जर |
| टेलीकॉम (Jio) | 22% रेवेन्यू बढ़ोतरी | टैरिफ हाइक और होम ब्रॉडबैंड एक्सपैंशन से बूस्ट |
कंपनी का लॉन्ग-टर्म आउटलुक मजबूत है, जिसमें Jio की लिस्टिंग और FWA ऑफरिंग जैसे कैटेलिस्ट शामिल हैं। निवेशक रिटेल सेक्टर की स्लोडाउन पर नजर रखें, जो आर्थिक ट्रेंड्स से प्रभावित। ब्रोकरेजेस का मानना है कि 2026 में मल्टीपल ट्रिगर्स से स्टॉक रिकवर कर सकता है, लेकिन निकट टर्म में रूसी ऑयल से जुड़ी अनिश्चितता बनी रहेगी।
Disclaimer: यह रिपोर्ट उपलब्ध रिपोर्ट्स और ट्रेंड्स पर आधारित है, निवेश सलाह नहीं।