सैलरी, सेविंग्स और टैक्स में बड़े बदलाव? बजट 2026 से पहले ICAI, FICCI और ASSOCHAM की ये मांगें जानें!
आयकर कानून में बदलाव की मांगें बढ़ रही हैं, खासकर सैलरी और सेविंग्स से जुड़ी राहतों पर। ICAI ने नई टैक्स रिजीम को ज्यादा व्यावहारिक बनाने पर जोर दिया है, जहां हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम पर डिडक्शन की अनुमति दी जाए। इससे मिडल क्लास को मेडिकल खर्चों में बचत होगी, खासकर महंगाई के दौर में। साथ ही, स्टैंडर्ड डिडक्शन को मौजूदा 75 हजार से बढ़ाकर 1.5 लाख रुपये करने की सिफारिश की गई है, जो सैलरीड कर्मचारियों को सीधा फायदा पहुंचाएगी।
ICAI ने वैकल्पिक जॉइंट टैक्सेशन सिस्टम की मांग भी रखी है, जहां मैरिड कपल्स अपनी इनकम को जोड़कर टैक्स फाइल कर सकें। इससे फैमिली यूनिट्स को टैक्स बोझ कम करने में मदद मिलेगी, विशेष रूप से जहां एक पार्टनर की इनकम कम हो। सरचार्ज थ्रेशोल्ड को 50 लाख से बढ़ाकर 75 लाख करने का प्रस्ताव है, जो ऊपरी मिडल क्लास को अनावश्यक टैक्स बढ़ोतरी से बचाएगा।
FICCI ने टीडीएस रेट्स को सरल बनाने पर फोकस किया है। वर्तमान में 37 से ज्यादा अलग-अलग रेट्स हैं, जिन्हें कुछ स्टैंडर्ड रेट्स में बदलने की मांग है। इससे बिजनेस पेमेंट्स में कैश फ्लो बेहतर होगा, खासकर जीएसटी से जुड़े बी2बी ट्रांजेक्शंस के लिए एग्जेम्प्शन की सिफारिश की गई है। साथ ही, टैक्स डिस्प्यूट्स के बैकलॉग को कम करने के लिए फास्ट-ट्रैक अपील सिस्टम और रिफंड रिलीज की समय सीमा तय करने का सुझाव है, जहां 5.4 लाख से ज्यादा केस पेंडिंग हैं।
ASSOCHAM ने सेविंग्स और इन्वेस्टमेंट को बढ़ावा देने के लिए टैक्स इंसेंटिव्स की मांग की है। बैंक इंटरेस्ट और लॉन्ग-टर्म इन्वेस्टमेंट्स पर टैक्स छूट बढ़ाने का प्रस्ताव है, जो आम आदमी की सेविंग्स को प्रोत्साहित करेगा। मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों के लिए 15% कंसेशनल टैक्स रेट की बहाली की सिफारिश की गई है, जो नए यूनिट्स को आकर्षित करेगी। साथ ही, आईबीसी के तहत लोन वेवर्स को टैक्सेबल इनकम न मानने का नियम बनाने पर जोर है, जो कॉर्पोरेट रिकवरी को आसान बनाएगा।
आरएंडडी एक्सपेंडिचर पर वेटेड डिडक्शन को बढ़ाने की मांग भी है, जहां 250% तक की छूट से इनोवेशन को बूस्ट मिलेगा। सीएसआर खर्च को बिजनेस एक्सपेंस मानकर डिडक्शन की अनुमति देने का सुझाव है, जो कंपनियों को सोशल प्रोजेक्ट्स में ज्यादा निवेश करने के लिए प्रेरित करेगा।
| निकाय | प्रमुख मांगें सैलरी और सेविंग्स से जुड़ी |
|---|---|
| ICAI | – हेल्थ इंश्योरेंस डिडक्शन नई रिजीम में बहाल- स्टैंडर्ड डिडक्शन 1.5 लाख तक- जॉइंट टैक्सेशन मैरिड कपल्स के लिए- सरचार्ज थ्रेशोल्ड 75 लाख |
| FICCI | – टीडीएस रेट्स को सरल बनाना- टैक्स डिस्प्यूट्स में फास्ट-ट्रैक अपील- जीएसटी से जुड़े पेमेंट्स पर एग्जेम्प्शन- इनकम टैक्स स्लैब्स की रिव्यू |
| ASSOCHAM | – बैंक इंटरेस्ट पर टैक्स इंसेंटिव्स- लॉन्ग-टर्म सेविंग्स पर छूट- कंसेशनल टैक्स रेट मैन्युफैक्चरिंग के लिए- सीएसआर को डिडक्टिबल एक्सपेंस मानना |
ये मांगें अगर लागू हुईं, तो सैलरीड क्लास को सालाना टैक्स बचत में 20-30% की बढ़ोतरी हो सकती है, खासकर सेविंग्स स्कीम्स में। FICCI ने ग्रीन टेक्नोलॉजी और ईवी पर इंसेंटिव्स की भी बात की है, जो इनडायरेक्ट रूप से पर्सनल फाइनेंस को प्रभावित करेगी। ASSOCHAM ने एमएसएमई के लिए सस्ते क्रेडिट और टाइमली पेमेंट्स की सिफारिश की है, जो जॉब क्रिएशन से सैलरी ग्रोथ को सपोर्ट करेगा।
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