बजट 2026 में रेलवे को 10-15% बढ़ी हुई कैपेक्स मिलने की उम्मीद, जिसमें सेफ्टी सिस्टम जैसे कवच, फ्रेट कॉरिडोर और वंदे भारत एक्सपैंशन पर फोकस। रोड इन्फ्रा के लिए 9-10% वृद्धि, एक्सप्रेसवे, बॉर्डर रोड्स और HAM मॉडल को बढ़ावा। एक्सपर्ट्स का मानना है कि प्राइवेट पार्टिसिपेशन और डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन से लॉजिस्टिक्स कॉस्ट घटेगा, जबकि मल्टीमोडल कनेक्टिविटी को मजबूत किया जाएगा।
बजट 2026 में रेलवे सेक्टर की संभावित घोषणाएं
रेलवे मिनिस्ट्री को बजट 2026 में रिकॉर्ड कैपिटल एक्सपेंडिचर मिलने की संभावना है, जो पिछले वर्ष के 2.65 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 2.75 से 2.8 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है। एक्सपर्ट्स के अनुसार, यह वृद्धि कैपेसिटी एक्सपैंशन, सेफ्टी अपग्रेड और फ्रेट मूवमेंट को बढ़ावा देने के लिए होगी। पिछले 11 वर्षों में रेलवे ने 35,000 किलोमीटर नई लाइनें जोड़ी हैं और लगभग 100% इलेक्ट्रिफिकेशन पूरा कर लिया है, लेकिन अब फोकस डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (DFC) पर है, जहां ईस्टर्न और वेस्टर्न कॉरिडोर की प्रोग्रेस को तेज किया जाएगा।
कवच सिस्टम, जो ऑटोमेटिक ट्रेन प्रोटेक्शन टेक्नोलॉजी है, को पूरे नेटवर्क में रोलआउट करने के लिए अतिरिक्त फंडिंग मिल सकती है। वर्तमान में, यह 1,500 किलोमीटर से अधिक ट्रैक पर इंस्टॉल है, लेकिन बजट में इसके लिए 10,000 किलोमीटर का टारगेट सेट किया जा सकता है। वंदे भारत ट्रेनों का एक्सपैंशन भी प्रमुख होगा, जिसमें स्लीपर वर्जन को जनवरी 2026 में लॉन्च करने के बाद नए रूट्स पर चलाने की योजना है। हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर, जैसे मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन, के लिए GBS (ग्रॉस बजटरी सपोर्ट) में रीअलोकेशन हो सकता है, जहां प्रोजेक्ट की स्पीड को बढ़ाने के लिए 20% अधिक फंडिंग की उम्मीद है।
एक्सपर्ट्स जैसे UBS और Stoxkart के एनालिस्ट्स का कहना है कि रोलिंग स्टॉक पर हाई अलोकेशन होगा, जिसमें नए कोच, वैगन और लोकोमोटिव शामिल हैं। फ्रेट शेयर को 45% तक बढ़ाने के लिए मल्टीमोडल लॉजिस्टिक्स पार्क्स (MMLP) को सपोर्ट मिलेगा, जो PM Gati Shakti योजना के तहत आएंगे। रेलवे CPSUs के प्राइवेटाइजेशन पर भी फोकस हो सकता है, खासकर नॉन-कोर सेक्टर्स में, जहां InvITs के जरिए एसेट मोनेटाइजेशन को तेज किया जाएगा।
रेलवे कैपेक्स की संभावित ब्रेकडाउन (अनुमानित आंकड़े, लाख करोड़ रुपये में)
| सेक्टर | FY 2025-26 अलोकेशन | FY 2026-27 अपेक्षित अलोकेशन | प्रमुख फोकस |
|---|---|---|---|
| कैपेसिटी एक्सपैंशन (नई लाइनें, डबलिंग) | 1.2 | 1.35 | डीकंजेशन और फ्रेट कॉरिडोर |
| सेफ्टी और सिग्नलिंग (कवच) | 0.5 | 0.65 | एक्सीडेंट रिडक्शन |
| स्टेशन मॉडर्नाइजेशन | 0.4 | 0.45 | अमृत भारत स्टेशन स्कीम |
| इलेक्ट्रिफिकेशन और रोलिंग स्टॉक | 0.35 | 0.4 | वंदे भारत, हाई-स्पीड ट्रेन |
| अन्य (MMLP, प्राइवेटाइजेशन) | 0.2 | 0.25 | लॉजिस्टिक्स इंटीग्रेशन |
यह टेबल एक्सपर्ट अनुमानों पर आधारित है, जहां कुल कैपेक्स में 10-15% वृद्धि की उम्मीद है।
रोड इन्फ्रास्ट्रक्चर पर सरकार की संभावित घोषणाएं
मिनिस्ट्री ऑफ रोड ट्रांसपोर्ट एंड हाइवेज (MoRTH) को बजट 2026 में 9-10% YoY वृद्धि मिल सकती है, जो पिछले वर्ष के अलोकेशन से बढ़कर लगभग 2.5 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है। नेशनल हाईवे नेटवर्क, जो 2013-14 से 60% बढ़कर 1,46,000 किलोमीटर हो चुका है, को और एक्सपैंड करने के लिए फोकस होगा। एक्सप्रेसवे, बॉर्डर रोड्स और इकोनॉमिक कॉरिडोर पर जोर दिया जाएगा, जहां भारतमाला परियोजना के फेज-2 को तेजी मिल सकती है।
एक्सपर्ट्स का मानना है कि हाइब्रिड एन्युटी मॉडल (HAM) और टोल-ऑपरेट-ट्रांसफर (TOT) के जरिए प्राइवेट कैपिटल को आकर्षित करने के लिए इंसेंटिव्स दिए जाएंगे, जैसे InvITs के माध्यम से कैपिटल रिसाइकलिंग। लॉजिस्टिक्स कॉस्ट को 9% तक घटाने के लिए मल्टीमोडल ट्रांसपोर्ट को बढ़ावा मिलेगा, जिसमें रेलवे और रोड्स का इंटीग्रेशन शामिल है। डिजिटल रोड एसेट मैनेजमेंट सिस्टम (RAMS) को नेशनल हाईवेज पर अनिवार्य बनाने के लिए फंडिंग हो सकती है, जो मेंटेनेंस कॉस्ट को ऑप्टिमाइज करेगा और सेफ्टी बढ़ाएगा।
सस्टेनेबिलिटी पर फोकस करते हुए, ग्रीन हाइवेज और EV चार्जिंग इन्फ्रा को सपोर्ट मिल सकता है, जहां टियर-2 और टियर-3 शहरों में कनेक्टिविटी को मजबूत किया जाएगा। PM Gati Shakti के तहत इंडस्ट्रियल कॉरिडोर को विकसित करने के लिए स्टेट्स को अतिरिक्त फाइनेंशियल सपोर्ट दिया जा सकता है। एनालिस्ट्स जैसे Moneycontrol और ET Infra के अनुसार, ऑर्डर इनफ्लो EPC प्लेयर्स के लिए हेल्दी रहेगा, लेकिन कॉन्ट्रैक्टर पेमेंट डिले को रिजॉल्व करने के लिए फास्टर डिस्प्यूट रेजोल्यूशन मैकेनिज्म लाया जा सकता है।
रोड इन्फ्रा की प्रमुख अपेक्षाएं
एक्सप्रेसवे एक्सपैंशन : 5,000 किलोमीटर नए एक्सप्रेसवे का टारगेट, जिसमें दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे की एक्सटेंशन शामिल।
बॉर्डर रोड्स : स्ट्रैटेजिक एरियाज में 2,000 किलोमीटर अतिरिक्त रोड्स, डिफेंस सेक्टर से लिंक।
HAM और TOT मॉडल : 20% अधिक प्रोजेक्ट्स को PPP के तहत लाना, प्राइवेट इन्वेस्टमेंट को बूस्ट।
डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन : RAMS और GIS इंटीग्रेशन से मेंटेनेंस को इफिशिएंट बनाना।
लॉजिस्टिक्स रिडक्शन : मल्टीमोडल पार्क्स से कॉस्ट 14% से घटाकर 9% करना।
सस्टेनेबल प्रैक्टिसेज : EV इन्फ्रा और ग्रीन मटेरियल्स के लिए इंसेंटिव्स।
एक्सपर्ट्स की राय: रेलवे और रोड इन्फ्रा का इंटीग्रेशन
रेलवे मिनिस्टर अश्विनी वैष्णव ने हाल ही में Davos 2026 में कहा कि रेलवे भारत की ग्रोथ और क्लाइमेट स्ट्रैटेजी का सेंट्रल पार्ट है, जहां इलेक्ट्रिफिकेशन और कैपेसिटी बिल्डिंग से कार्बन एमिशन घटेगा। Deloitte और UBS के एक्सपर्ट्स का मानना है कि बजट में डिफेंस, रेलवे और रोड्स पर स्टेबल अलोकेशन होगा, लेकिन रोलिंग स्टॉक और सिग्नलिंग पर हाई स्पेंडिंग।
Chaitanya Projects Consultancy के संजय कुमार सिन्हा ने बताया कि बजट से कैश-फ्लो सर्टेनिटी और फास्टर डिसिजन-मेकिंग मिलेगी, जो एक्सप्रेसवे, ब्रिजेज और टनल्स को सपोर्ट करेगी। DreamFolks की लिबराथा कल्लत ने PM Gati Shakti और इंडस्ट्रियल कॉरिडोर पर जोर दिया, जो टियर-2 शहरों में इन्फ्रा को बूस्ट करेगा। Stoxkart के प्रणय अग्रवाल ने रेलवे कैपेक्स को 2.75 लाख करोड़ तक बढ़ने की भविष्यवाणी की, जो EPC, सेफ्टी सिस्टम और इलेक्ट्रिफिकेशन सेक्टर को फायदा पहुंचाएगा।
इन्फ्रा सेक्टर के लिए PPP शिफ्ट महत्वपूर्ण होगा, जहां रोड ट्रांसपोर्ट, रेलवे और पावर मिनिस्ट्रीज में प्रोजेक्ट्स को प्राइवेट सेक्टर के जरिए एक्जीक्यूट किया जाएगा। कुल मिलाकर, बजट 2026 से इन्फ्रा इन्वेस्टमेंट 11.21 लाख करोड़ रुपये से आगे बढ़ सकता है, जो GDP ग्रोथ और जॉब क्रिएशन को सपोर्ट करेगा।
## डिस्क्लेमर : यह लेख न्यूज रिपोर्ट्स, एक्सपर्ट टिप्स और सोर्सेज पर आधारित है।