India EU FTA: किस चीज पर कितना घटा टैरिफ, कितने सस्ते होंगे यूरोप से आने वाले सामान, ये रही पूरी डिटेल

भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते से यूरोपीय निर्यातों पर 96.6% टैरिफ कम या खत्म होंगे, जिससे सालाना 4 अरब यूरो की बचत होगी। कारों पर टैरिफ 110% से 10% तक घटेगा, वाइन पर 150% से 20-30%, स्पिरिट्स पर 40% तक, जबकि मशीनरी, केमिकल्स और फार्मास्यूटिकल्स पर ज्यादातर टैरिफ खत्म। इससे यूरोपीय सामान 20-60% तक सस्ते हो सकते हैं, खासकर ऑटोमोबाइल, शराब और प्रोसेस्ड फूड में। भारतीय निर्यातों को भी 99.5% टैरिफ लाइनों पर राहत मिलेगी।

भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौता: टैरिफ में कटौती की पूरी डिटेल

भारत और यूरोपीय संघ के बीच हुए मुक्त व्यापार समझौते (FTA) से यूरोपीय सामानों पर लगने वाले टैरिफ में बड़ी कटौती होगी, जिससे भारतीय बाजार में आयातित उत्पादों की कीमतें काफी कम हो जाएंगी। यह समझौता यूरोपीय निर्यातों के 96.6% पर टैरिफ कम या पूरी तरह खत्म करेगा, जबकि भारतीय निर्यातों पर यूरोपीय संघ 99.5% टैरिफ लाइनों को सात सालों में उदार बनाएगा। इससे द्विपक्षीय व्यापार दोगुना होने की उम्मीद है, और भारतीय उपभोक्ताओं को सस्ते यूरोपीय उत्पाद मिलेंगे।

प्रमुख सेक्टरों में टैरिफ कटौती

समझौते के तहत विभिन्न सेक्टरों में टैरिफ चरणबद्ध तरीके से घटाए जाएंगे। यहां प्रमुख कैटेगरी की डिटेल दी गई है:

ऑटोमोबाइल और पार्ट्स : कारों पर मौजूदा 110% टैरिफ को चरणबद्ध रूप से घटाकर 10% तक लाया जाएगा, जिसमें प्रति वर्ष 2.5 लाख वाहनों की कोटा व्यवस्था शामिल है। कार पार्ट्स पर टैरिफ पांच से दस सालों में पूरी तरह खत्म हो जाएगा। इससे यूरोपीय कारों की कीमतें 50-60% तक कम हो सकती हैं। उदाहरण के लिए, एक 50 लाख रुपये की इंपोर्टेड कार पर टैरिफ बचत से 20-30 लाख रुपये की कमी आ सकती है।

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मशीनरी और इलेक्ट्रिकल उपकरण : 44% तक के टैरिफ ज्यादातर खत्म हो जाएंगे। इससे इंडस्ट्रियल मशीनरी, इलेक्ट्रिकल इक्विपमेंट और एयरक्राफ्ट पार्ट्स सस्ते होंगे, जिससे भारतीय मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को फायदा मिलेगा। कीमतों में 20-30% की गिरावट संभव है, जैसे एक हाई-टेक मशीन की लागत 10% कम हो सकती है।

केमिकल्स और फार्मास्यूटिकल्स : केमिकल्स पर 22% और फार्मास्यूटिकल्स पर 11% टैरिफ लगभग खत्म। इससे दवाएं और केमिकल प्रोडक्ट्स 10-15% सस्ते हो सकते हैं, जो हेल्थकेयर और इंडस्ट्री के लिए महत्वपूर्ण है।

शराब और बेवरेज : वाइन पर 150% से घटाकर 20-30%, स्पिरिट्स पर 40%, और बीयर पर 50% तक टैरिफ कम। इससे यूरोपीय वाइन और स्पिरिट्स की कीमतें 40-50% गिर सकती हैं। उदाहरण: एक 5,000 रुपये की इंपोर्टेड वाइन 2,500-3,000 रुपये में उपलब्ध हो सकती है।

प्रोसेस्ड फूड और एग्री-प्रोडक्ट्स : फ्रूट जूस, प्रोसेस्ड फूड, ऑलिव ऑयल और वेजिटेबल ऑयल पर टैरिफ खत्म या कम। चॉकलेट, पास्ता और अन्य प्रोसेस्ड आइटम्स पर 50% से घटाकर शून्य। इससे ये उत्पाद 30-40% सस्ते होंगे, जैसे यूरोपीय चॉकलेट की कीमत 20% कम।

मेडिकल और ऑप्टिकल इक्विपमेंट : 90% यूरोपीय ऑप्टिकल, मेडिकल और सर्जिकल इक्विपमेंट पर टैरिफ खत्म। इससे हेल्थकेयर डिवाइसेज 15-25% सस्ते हो सकते हैं।

एयरक्राफ्ट और स्पेसक्राफ्ट : लगभग सभी यूरोपीय एयरक्राफ्ट और स्पेसक्राफ्ट निर्यातों पर टैरिफ खत्म, जो एविएशन सेक्टर को बूस्ट देगा।

टैरिफ कटौती का प्रभाव: कितने सस्ते होंगे सामान?

टैरिफ में कटौती से यूरोपीय सामानों की लैंडेड कॉस्ट कम होगी, जो सीधे उपभोक्ता कीमतों पर असर डालेगी। यहां अनुमानित मूल्य गिरावट की डिटेल:

उत्पाद कैटेगरीमौजूदा टैरिफ (%)नया टैरिफ (%)अनुमानित कीमत गिरावट (%)उदाहरण (मौजूदा कीमत → नई कीमत)
कारें (EU ब्रांड्स जैसे BMW, Mercedes)11010 (चरणबद्ध)50-6050 लाख → 20-25 लाख
वाइन और स्पिरिट्स15020-4040-505,000 → 2,500-3,000
बीयर100+5030-40500 → 300-350
चॉकलेट और प्रोसेस्ड फूड50030-40200 → 120-140
मशीनरी पार्ट्स44020-301 लाख → 70,000-80,000
दवाएं11010-151,000 → 850-900
ऑलिव ऑयल40+025-35800 → 500-600
मेडिकल इक्विपमेंट20+0 (90% पर)15-2510,000 → 7,500-8,500

यह कटौती चरणबद्ध होगी, जैसे कारों पर पांच सालों में पूरी। इससे भारतीय बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी, और लोकल मैन्युफैक्चरर्स को भी इनोवेशन के लिए प्रेरणा मिलेगी।

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भारतीय निर्यातों को फायदा: रिवर्स टैरिफ कटौती

समझौते से भारतीय निर्यातों को भी राहत मिलेगी। यूरोपीय संघ भारतीय सामानों पर 99.5% टैरिफ लाइनों को सात सालों में उदार बनाएगा। प्रमुख लाभार्थी सेक्टर:

टेक्सटाइल्स और अपैरल : टैरिफ शून्य, जिससे निर्यात बढ़ेगा और रोजगार सृजन होगा।

लेदर और फुटवेयर : पूरी तरह टैरिफ-फ्री, बाजार एक्सेस बढ़ेगा।

मरीन प्रोडक्ट्स : शून्य टैरिफ से सीफूड निर्यात दोगुना हो सकता है।

जेम्स एंड ज्वेलरी : टैरिफ कटौती से वैश्विक प्रतिस्पर्धा मजबूत।

हैंडीक्राफ्ट्स और इंजीनियरिंग गुड्स : कम टैरिफ से यूरोपीय बाजार में एंट्री आसान।

इससे भारतीय एक्सपोर्टर्स को 93% द्विपक्षीय व्यापार वैल्यू पर शून्य टैरिफ मिलेगा, जो 10 सालों में लागू होगा।

अन्य महत्वपूर्ण प्रावधान

सर्विसेज सेक्टर : यूरोपीय संघ भारत को फाइनेंशियल और मैरीटाइम सर्विसेज में प्रिविलेज्ड एक्सेस देगा, जबकि भारत यूरोपीय सर्विस प्रोवाइडर्स को खोलेगा।

इनवेस्टमेंट फ्लो : समझौता इनवेस्टमेंट बढ़ाएगा, सप्लाई चेन इंटीग्रेशन मजबूत करेगा।

कोटा सिस्टम : संवेदनशील सेक्टरों जैसे ऑटोमोबाइल में कोटा लागू, ताकि लोकल इंडस्ट्री प्रभावित न हो।

ट्रेड वैल्यू : वर्तमान 180 अरब यूरो के द्विपक्षीय व्यापार को 2032 तक दोगुना करने का लक्ष्य।

यह समझौता दोनों पक्षों के लिए रणनीतिक महत्व का है, जो वैश्विक व्यापार तनावों के बीच नए अवसर खोलेगा। टैरिफ कटौती से भारतीय उपभोक्ताओं को किफायती विकल्प मिलेंगे, जबकि एक्सपोर्टर्स को बड़ा बाजार।

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