भारत-अमेरिका ट्रेड डील: ‘चाय, कॉफी से लेकर स्मार्टफोन, केला, अमरूद और आम तक पर 0 टैरिफ’, पीयूष गोयल ने बताया किन सामानों पर शून्य टैरिफ

“भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते के तहत कई भारतीय निर्यातों पर अमेरिका में शून्य टैरिफ लागू होगा, जिसमें कृषि उत्पाद जैसे चाय, कॉफी, मसाले, फल और सब्जियां शामिल हैं। फार्मास्यूटिकल्स, स्मार्टफोन और जेम्स एंड डायमंड्स जैसे क्षेत्रों को भी लाभ मिलेगा, जिससे द्विपक्षीय व्यापार 500 बिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है। किसानों के हितों की रक्षा की गई है, और जीएम उत्पादों पर कोई रियायत नहीं दी गई।”

केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने हाल ही में भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते की घोषणा की, जिसमें भारतीय निर्यातकों को बड़ा लाभ मिलने वाला है। इस समझौते के तहत अमेरिका ने कई उत्पादों पर टैरिफ को शून्य कर दिया है, जिससे भारतीय किसानों, एमएसएमई और निर्यातकों को नए बाजार मिलेंगे। गोयल ने स्पष्ट किया कि यह समझौता आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक कदम है, जहां संवेदनशील क्षेत्रों जैसे डेयरी, सोयामील और जीएम फूड्स पर कोई रियायत नहीं दी गई।

इस समझौते से भारतीय कृषि उत्पादों को अमेरिकी बाजार में बिना किसी टैरिफ के प्रवेश मिलेगा, जो पहले 25% से 50% तक के टैरिफ का सामना करते थे। अब टैरिफ को घटाकर 18% किया गया है, लेकिन कई उत्पादों पर इसे पूरी तरह शून्य कर दिया गया है। इससे भारतीय निर्यात में 44 बिलियन डॉलर की वृद्धि की संभावना है, विशेष रूप से पहले चरण में। गोयल ने कहा कि यह समझौता द्विपक्षीय व्यापार को 500 बिलियन डॉलर तक ले जाने में मदद करेगा, जो वर्तमान में लगभग 200 बिलियन डॉलर है।

शून्य टैरिफ वाले प्रमुख कृषि उत्पाद

समझौते में कृषि क्षेत्र को प्राथमिकता दी गई है। गोयल ने बताया कि चाय, कॉफी और मसालों जैसे उत्पादों पर अमेरिका में अब कोई टैरिफ नहीं लगेगा। इससे भारत के चाय उत्पादक राज्यों जैसे असम, पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु को लाभ होगा, जहां सालाना 1,300 मिलियन किलोग्राम चाय का उत्पादन होता है। इसी तरह, कॉफी निर्यात, जो मुख्य रूप से कर्नाटक और केरल से होता है, में 20% की वृद्धि की उम्मीद है।

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फलों और सब्जियों की श्रेणी में केला, आम, अमरूद, एवोकाडो, कीवी, पपीता, अनानास, मशरूम और सब्जी की जड़ें शामिल हैं। भारत दुनिया का सबसे बड़ा आम उत्पादक है, जहां सालाना 20 मिलियन टन उत्पादन होता है, और अब अमेरिकी बाजार में बिना टैरिफ के पहुंच से उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र के किसानों को सीधा फायदा मिलेगा। अमरूद और केले के निर्यात में भी 15-20% की बढ़ोतरी संभव है, क्योंकि अमेरिका में इनकी मांग उच्च है।

अन्य उत्पादों में कोकोनट ऑयल, कोपरा, वेजिटेबल वैक्स, सीरियल्स, बार्ले, बेकरी प्रोडक्ट्स, कोको प्रोडक्ट्स, सेसमे सीड्स, पोपी सीड्स और साइट्रस जूस शामिल हैं। कैश्यू नट, अरेका नट, ब्राजील नट और चेस्टनट जैसे नट्स पर भी शून्य टैरिफ लागू होगा, जो दक्षिण भारत के किसानों के लिए लाभदायक साबित होगा।

गैर-कृषि उत्पादों पर प्रभाव

श्रेणीउत्पादअनुमानित वार्षिक निर्यात मूल्य (बिलियन USD)लाभदायक राज्य
पेय पदार्थचाय, कॉफी, साइट्रस जूस2.5असम, कर्नाटक, तमिलनाडु
मसालेमसाले (हल्दी, मिर्च, जीरा)1.8राजस्थान, गुजरात, आंध्र प्रदेश
फलकेला, आम, अमरूद, एवोकाडो, कीवी, पपीता, अनानास3.2उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक
सब्जियांमशरूम, सब्जी की जड़ें0.7हिमाचल प्रदेश, पंजाब
नट्स और तेलकैश्यू नट, कोकोनट ऑयल, सेसमे सीड्स1.5केरल, गोवा, तमिलनाडु
अन्यबार्ले, बेकरी प्रोडक्ट्स, कोको प्रोडक्ट्स1.0उत्तर भारत के राज्य

कृषि के अलावा, फार्मास्यूटिकल्स सेक्टर को बड़ा बढ़ावा मिलेगा। भारत के जेनेरिक ड्रग्स और अन्य मेडिसिन्स पर अमेरिका में शून्य टैरिफ लागू होगा, जो वर्तमान में 13 बिलियन डॉलर के निर्यात को 20 बिलियन तक ले जा सकता है। गोयल ने कहा कि यह समझौता भारत की फार्मा इंडस्ट्री, विशेष रूप से हैदराबाद और मुंबई आधारित कंपनियों को मजबूत करेगा।

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स्मार्टफोन निर्यात पर भी शून्य टैरिफ जारी रहेगा, जो भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देगा। वर्तमान में भारत से स्मार्टफोन निर्यात 10 बिलियन डॉलर है, और यह समझौता इसे दोगुना करने में मदद करेगा। एयरक्राफ्ट पार्ट्स, मशीनरी कंपोनेंट्स और बेसिक ऑटो पार्ट्स पर भी टैरिफ शून्य होगा, जिससे उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु के ऑटोमोटिव हब को फायदा मिलेगा।

जेम्स एंड डायमंड्स, जो बंगाल, केरल और महाराष्ट्र से निर्यात होते हैं, पर शून्य टैरिफ से 5 बिलियन डॉलर की अतिरिक्त कमाई संभव है। अन्य उत्पादों में एसेंशियल ऑयल्स, होम डेकोर आइटम्स जैसे चैंडेलियर्स, इनऑर्गेनिक केमिकल्स और सीड्स शामिल हैं। गोयल ने जोर दिया कि यह समझौता एमएसएमई और आर्टिसन्स को भी लाभ पहुंचाएगा, क्योंकि टेक्सटाइल्स और लेदर उत्पादों पर टैरिफ कम किया गया है।

समझौते के प्रमुख लाभ और चुनौतियां

निर्यात वृद्धि : पहले चरण में 44 बिलियन डॉलर के निर्यात पर प्रभाव, जो भारतीय जीडीपी को 0.5% तक बढ़ा सकता है।

किसान सुरक्षा : डेयरी, लेंटिल्स, सीरियल्स जैसे मिलेट्स (ज्वार, बाजरा), ग्रीन पीज, हनी, फ्लावर्स, मीट प्रोडक्ट्स और इथेनॉल पर कोई रियायत नहीं। अमेरिका से जीएम फूड्स के आयात पर प्रतिबंध जारी।

व्यापार संतुलन : अमेरिका ने 25% पुनिटिव ड्यूटी हटा दी, जबकि पारस्परिक टैरिफ 25% से घटकर 18% हुआ। इससे भारत के निर्यातकों को प्रतिस्पर्धी लाभ मिलेगा।

क्षेत्रीय प्रभाव : उत्तर भारत के किसान फलों से लाभान्वित होंगे, जबकि दक्षिण भारत नट्स और तेलों से। फार्मा और टेक सेक्टर में रोजगार सृजन की संभावना 1 मिलियन तक।

भविष्य की संभावनाएं : स्मार्टफोन और इलेक्ट्रॉनिक गुड्स पर एमएफएन रिजीम के तहत औसत 0.41% टैरिफ जारी, जो क्रिटिकल टेक्नोलॉजी आयात को आसान बनाएगा।

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इस समझौते से भारतीय अर्थव्यवस्था में नई ऊर्जा आएगी, विशेष रूप से ऐसे समय जब वैश्विक व्यापार चुनौतियों का सामना कर रहा है। गोयल ने कहा कि यह समझौता भारत की रेड लाइंस का सम्मान करता है, और किसानों, एमएसएमई तथा आर्टिसन्स के हितों को कोई नुकसान नहीं पहुंचेगा।

क्षेत्रअनुमानित लाभ (बिलियन USD)प्रमुख उत्पाद
फार्मास्यूटिकल्स7जेनेरिक ड्रग्स, मेडिसिन्स
इलेक्ट्रॉनिक्स5स्मार्टफोन, मशीनरी पार्ट्स
जेम्स एंड ज्वेलरी5डायमंड्स, कोइन्स, प्लैटिनम
टेक्सटाइल्स और लेदर3गारमेंट्स, शूज
अन्य4एसेंशियल ऑयल्स, चैंडेलियर्स, इनऑर्गेनिक केमिकल्स

समझौते के कार्यान्वयन से भारतीय निर्यातकों को अमेरिकी बाजार में बेहतर पहुंच मिलेगी, जो विश्व का सबसे बड़ा उपभोक्ता बाजार है। इससे न केवल व्यापार बढ़ेगा, बल्कि तकनीकी ट्रांसफर और निवेश भी बढ़ेगा।

Disclaimer: यह समाचार रिपोर्ट विभिन्न रिपोर्ट्स, टिप्स और स्रोतों पर आधारित है।

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