“अमेरिका-इजराइल के संयुक्त हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत के बाद ईरान ने जवाबी हमले शुरू किए हैं। क्रूड ऑयल की कीमतें तेजी से बढ़कर ब्रेंट 72-73 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गई हैं। अगर होर्मुज जलडमरूमध्य प्रभावित हुआ तो कीमतें 80-100 डॉलर या इससे ऊपर जा सकती हैं, जिससे भारत में पेट्रोल-डीजल महंगा होने के साथ रिलायंस जैसी कंपनियों के रिफाइनिंग मार्जिन दबाव में आएंगे और OMC को सब्सिडी बढ़ाने की जरूरत पड़ सकती है।”
इजराइल-ईरान युद्ध: क्रूड ऑयल संकट और भारत पर असर
अमेरिका और इजराइल ने 28 फरवरी 2026 को ईरान पर बड़े पैमाने पर हमले किए, जिसमें ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई सहित कई शीर्ष अधिकारी मारे गए। इजराइल ने तेहरान में कई दौर के हमले किए, जबकि ईरान ने इजराइल, अमेरिकी सैन्य अड्डों और खाड़ी देशों में जवाबी मिसाइल हमले किए। इस संघर्ष से वैश्विक ऊर्जा बाजार में हड़कंप मच गया है।
क्रूड ऑयल की कीमतों में तेज उछाल आया है। ब्रेंट क्रूड शुक्रवार को 72.87 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ, जो पिछले कुछ महीनों का उच्चतम स्तर है। WTI क्रूड 67.02 डॉलर पर पहुंचा। बाजार विशेषज्ञों का अनुमान है कि अगर संघर्ष लंबा खिंचा या होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही बाधित हुई तो कीमतें 80 डॉलर से ऊपर जा सकती हैं, कुछ मामलों में 100 डॉलर के पार भी।
भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा क्रूड आयातक है, जहां 86-89% जरूरत आयात से पूरी होती है। जनवरी-फरवरी 2026 में भारत के कुल क्रूड आयात का लगभग 50% हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर आया, जो रोजाना करीब 2.6 मिलियन बैरल है। यह मार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति का 20% हिस्सा संभालता है। कोई भी रुकावत भारत के लिए आपूर्ति संकट पैदा कर सकती है, जिससे कीमतों में ‘वार प्रीमियम’ जुड़ जाएगा।
रिलायंस इंडस्ट्रीज पर प्रभाव
मुकेश अंबानी की Reliance Industries दुनिया की सबसे बड़ी रिफाइनिंग क्षमता वाली कंपनी है, जो जामनगर रिफाइनरी के जरिए बड़े पैमाने पर क्रूड प्रोसेस करती है। उच्च क्रूड कीमतों से रिफाइनिंग मार्जिन (ग्रॉस रिफाइनिंग मार्जिन – GRM) पर दबाव पड़ता है, क्योंकि कच्चे तेल की लागत बढ़ने से उत्पादों (पेट्रोल, डीजल, जेट फ्यूल) की बिक्री मूल्य में तुरंत समायोजन नहीं हो पाता।
पिछले उच्च क्रूड चक्रों में रिलायंस के GRM में 20-30% तक गिरावट देखी गई है। अगर क्रूड 100 डॉलर पार करता है तो कंपनी के पेट्रोकेमिकल और फ्यूल रिटेल सेगमेंट में लागत बढ़ेगी, जबकि निर्यात मार्जिन प्रभावित होंगे। हालांकि, रिलायंस की विविधता (टेलीकॉम, रिटेल) से कुल प्रभाव सीमित रह सकता है, लेकिन शेयर बाजार में तत्काल गिरावट की आशंका है।
ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMC) की मुश्किलें
भारत में इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम जैसी OMC क्रूड आयात कर पेट्रोल-डीजल बेचती हैं। उच्च क्रूड से उनके इनपुट कॉस्ट बढ़ते हैं। अगर अंतरराष्ट्रीय कीमतें 80-100 डॉलर पर स्थिर हुईं तो:
पेट्रोल-डीजल के दामों में 10-20 रुपये प्रति लीटर तक बढ़ोतरी हो सकती है (अगर सरकार सब्सिडी नहीं देती)।
महंगाई बढ़ेगी, क्योंकि ट्रांसपोर्ट और विनिर्माण लागत प्रभावित होगी।
सरकार को सब्सिडी बढ़ानी पड़ सकती है, जो राजकोषीय घाटे पर दबाव डालेगी।
मुख्य प्रभाव और आंकड़े
| पैमाना | वर्तमान स्थिति (मार्च 2026) | संभावित स्थिति (युद्ध लंबा खिंचने पर) | भारत पर प्रभाव |
|---|---|---|---|
| ब्रेंट क्रूड कीमत | 72-73 डॉलर प्रति बैरल | 80-100+ डॉलर प्रति बैरल | आयात बिल में 20-40% वृद्धि |
| भारत का क्रूड आयात | ~5 मिलियन बैरल प्रतिदिन | होर्मुज रिस्क से 50% प्रभावित | आपूर्ति संकट, महंगाई बढ़ोतरी |
| रिलायंस GRM | सामान्य स्तर | 20-30% गिरावट संभावित | लाभ में कमी, शेयर दबाव |
| OMC सब्सिडी जरूरत | सीमित | उच्च क्रूड पर बढ़ोतरी | राजकोषीय बोझ |
| महंगाई प्रभाव | नियंत्रित | CPI में 1-2% अतिरिक्त वृद्धि | आम आदमी पर असर |
युद्ध के लंबे चलने पर भारत रूस से क्रूड आयात बढ़ा सकता है, जैसा 2022-2025 में हुआ था, लेकिन होर्मुज रिस्क से वैश्विक कीमतें प्रभावित होंगी। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर ईरान उत्पादन या निर्यात प्रभावित हुआ तो वैश्विक आपूर्ति में 3-5 मिलियन बैरल प्रतिदिन की कमी आ सकती है।
यह स्थिति भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए चुनौती है। सरकार को वैकल्पिक स्रोतों (अमेरिका, रूस, अफ्रीका) पर फोकस बढ़ाना होगा और रणनीतिक भंडारण का इस्तेमाल करना पड़ सकता है।
Disclaimer: यह लेख समाचार, विश्लेषण और उपलब्ध रुझानों पर आधारित है। बाजार में उतार-चढ़ाव सामान्य है, निवेश से पहले विशेषज्ञ सलाह लें।