RBI का बड़ा ऐलान: 1 जुलाई 2026 से रीट को मिलेगा बैंक लोन, लेकिन सख्त शर्तों के साथ! अब जानें पूरी डिटेल

“आरबीआई ने रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट्स (रीट) को बैंकों से लोन लेने की राह खोल दी है। 1 जुलाई 2026 से लागू होने वाले नए नियमों के तहत केवल लिस्टेड और अनुभवी रीट ही योग्य होंगे, जबकि कुल एक्सपोजर 49% एसेट वैल्यू तक सीमित रहेगा। यह कदम रियल एस्टेट सेक्टर में फंडिंग बढ़ाएगा और निवेशकों के लिए स्थिर रिटर्न सुनिश्चित करेगा।”

आरबीआई का बड़ा कदम: रीट को बैंक फाइनेंसिंग की अनुमति

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट्स (REITs) के लिए बैंक से लोन लेने का रास्ता साफ कर दिया है। फरवरी 2026 में जारी ड्राफ्ट गाइडलाइंस के मुताबिक, 1 जुलाई 2026 से ये नियम लागू होंगे, हालांकि कुछ मामलों में पहले भी लागू हो सकते हैं। यह फैसला भारतीय रियल एस्टेट सेक्टर के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि अब तक रीट मुख्य रूप से मार्केट से फंड जुटाते थे, लेकिन अब बैंक लोन से लंबी अवधि की फाइनेंसिंग आसान हो जाएगी।

रीट को लोन देने की मुख्य योग्यताएं बैंक केवल उन REITs को लोन दे सकेंगे जो निम्नलिखित शर्तें पूरी करती हैं:

SEBI के साथ रजिस्टर्ड और रेगुलेटेड हों।

स्टॉक एक्सचेंज पर लिस्टेड हों।

कम से कम तीन साल का ऑपरेशनल ट्रैक रिकॉर्ड हो।

पिछले दो वित्तीय वर्षों में पॉजिटिव नेट डिस्ट्रीब्यूटेबल कैश फ्लो रहा हो।

पिछले तीन वर्षों में कोई मटेरियल एडवर्स रेगुलेटरी एक्शन न हुआ हो।

ये शर्तें सुनिश्चित करती हैं कि केवल मजबूत और पारदर्शी रीट ही बैंक फंडिंग का लाभ उठा सकें।

एक्सपोजर लिमिट और रिस्क मैनेजमेंट RBI ने सख्त लिमिट लगाई हैं ताकि बैंक का रिस्क कंट्रोल में रहे:

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किसी एक बैंक की कुल एक्सपोजर (सभी रीट मिलाकर) उसके एलिजिबल कैपिटल बेस का अधिकतम 10% हो सकती है।

किसी एक रीट (और उसके SPVs/होल्डिंग कंपनियों) पर सभी बैंकों की कुल क्रेडिट एक्सपोजर उस रीट की एसेट वैल्यू (पिछले वित्तीय वर्ष के 31 मार्च तक) का 49% से ज्यादा नहीं हो सकती। बैंक बोर्ड क्रेडिट रेटिंग के आधार पर इससे कम लिमिट भी तय कर सकता है।

ये कैप्स कमर्शियल रियल एस्टेट (CRE) एक्सपोजर की ओवरऑल प्रूडेंशियल सीमा के अंदर आते हैं।

लोन की संरचना और सिक्योरिटी

लोन केवल अमॉर्टाइज्ड तरीके से दिए जाएंगे, बुलेट या बैलून प्रिंसिपल रीपेमेंट वाली संरचना नहीं होगी।

फंड का एंड-यूज सख्ती से मॉनिटर किया जाएगा ताकि प्रतिबंधित गतिविधियों में इस्तेमाल न हो।

लोन पूरी तरह सिक्योर्ड होगा: आइडेंटिफाइड एसेट्स पर मॉर्टगेज, एस्क्रो अकाउंट या रिसीवेबल चार्ज के जरिए कैश फ्लो प्रोटेक्शन।

जमीन अधिग्रहण (लैंड एक्विजिशन) के लिए फंडिंग पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगी, भले ही वह किसी प्रोजेक्ट का हिस्सा हो। लोन केवल ऑपरेशनल या कम्पलीटेड इनकम-जनरेटिंग एसेट्स के लिए होगा।

बैंकों के लिए जरूरी पॉलिसी प्रत्येक बैंक को बोर्ड-अप्रूव्ड पॉलिसी बनानी होगी, जिसमें शामिल होगा:

लेंडिंग अप्रेजल प्रोसेस

डेब्ट सर्विस कवरेज रेशियो (DSCR) बेंचमार्क

एक्सपोजर लिमिट्स

रिस्क असेसमेंट

रीट सेक्टर पर प्रभाव यह कदम भारतीय रियल एस्टेट सेक्टर को नई ऊर्जा देगा। रीट जैसे Embassy Office Parks REIT, Brookfield India Real Estate Trust और Mindspace Business Parks REIT अब बैंक फंडिंग से बड़े प्रोजेक्ट्स एक्सपैंड कर सकेंगे। इससे निवेशकों को बेहतर लिक्विडिटी और स्थिर डिविडेंड मिल सकता है। साथ ही, सेक्टर में फंडिंग की कमी दूर होगी, जो पिछले वर्षों में एक बड़ी चुनौती रही है।

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InvIT के लिए भी समान नियम RBI ने InvIT (इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट्स) के लिए भी इसी तरह की प्रूडेंशियल गाइडलाइंस प्रस्तावित की हैं, ताकि दोनों सेक्टर में एकसमानता बनी रहे।

फीडबैक और लागू होने की समयसीमा ड्राफ्ट पर पब्लिक कमेंट्स 6 मार्च 2026 तक मांगे गए हैं। फाइनल गाइडलाइंस 1 जुलाई 2026 से प्रभावी होंगी। यह बदलाव रियल एस्टेट और बैंकिंग सेक्टर के बीच नए संबंध स्थापित करेगा।

Disclaimer: यह खबर विभिन्न सार्वजनिक रिपोर्ट्स और RBI के ड्राफ्ट गाइडलाइंस पर आधारित है। निवेश संबंधी कोई निर्णय लेने से पहले विशेषज्ञ सलाह लें।

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