“चांदी की कीमतें हाल के दिनों में तेजी से गिरकर ₹2.36 लाख प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई हैं, लेकिन बाजार में लगातार उतार-चढ़ाव जारी है। जनवरी में ₹4 लाख के रिकॉर्ड हाई से अब तक 40% से ज्यादा की गिरावट आई है, जबकि वैश्विक और घरेलू कारकों से यह अस्थिरता बनी हुई है। निवेशक अब सतर्क हैं कि क्या यह सुधार है या लंबी गिरावट की शुरुआत।”
16 फरवरी 2026 को भारत में चांदी की कीमतों में लगातार तीसरे दिन गिरावट दर्ज की गई है। MCX पर मार्च 2026 डिलीवरी वाली चांदी ₹8,265 या 3.3% की गिरावट के साथ ₹2,36,100 प्रति किलोग्राम पर ट्रेड कर रही है। स्पॉट मार्केट में भी कीमतें ₹2.36 लाख से ₹2.68 लाख प्रति किलोग्राम के बीच घूम रही हैं, जहां कुछ जगहों पर ₹2,68,000 प्रति किलो तक पहुंची हैं, लेकिन कुल मिलाकर जनवरी के पीक से भारी सुधार हुआ है।
प्रति ग्राम चांदी अब ₹238 से ₹268 के बीच ट्रेड हो रही है, जबकि 10 ग्राम के लिए ₹2,380 से ₹2,680 तक का भाव है। प्रमुख शहरों में दिल्ली, मुंबई और कोलकाता में औसतन ₹2,68,000 से ₹2,75,000 प्रति किलो का स्तर है, लेकिन दक्षिणी शहरों में थोड़ा प्रीमियम देखा जा रहा है।
यह गिरावट जनवरी 2026 में ₹4 लाख प्रति किलोग्राम के ऑल-टाइम हाई से शुरू हुई, जहां से अब तक 40% से अधिक की गिरावट आ चुकी है। फरवरी के पहले 15 दिनों में ही कीमतें 21% तक लुढ़की हैं।
मुख्य कारण क्या हैं?
चांदी की यह उथल-पुथल कई वैश्विक और घरेलू कारकों से जुड़ी है:
वैश्विक बाजार में डॉलर की मजबूती — अमेरिकी डॉलर इंडेक्स में तेजी आई है, जिससे डॉलर में मूल्यांकित चांदी विदेशी खरीदारों के लिए महंगी हो गई। मजबूत डॉलर ने प्रेसियस मेटल्स पर दबाव बढ़ाया है।
फेड रेट नीति और ब्याज दरों की उम्मीद — मजबूत अमेरिकी लेबर डेटा से फेडरल रिजर्व ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचा रख सकता है, जिससे गैर-उपज वाले एसेट्स जैसे चांदी की मांग घटी है।
इंडस्ट्रियल डिमांड में सुस्ती — चांदी का 50-55% उपयोग इंडस्ट्रियल सेक्टर में होता है, जैसे सोलर पैनल, इलेक्ट्रॉनिक्स और ऑटोमोबाइल। 2025 में तेज रैली के बाद मैन्युफैक्चरर्स ने स्टॉक जमा कर लिया, अब नई खरीदारी में कमी आई है। सोलर सेक्टर में हाई प्राइस से अल्टरनेटिव तरीकों की तलाश बढ़ी है।
ओवरहीटेड मार्केट और प्रॉफिट बुकिंग — 2025 में चांदी 130% से ज्यादा चढ़ी थी। जनवरी 2026 में निवेशकों की भारी खरीदारी (खासकर भारत और चीन से रिटेल डिमांड) ने कीमतें ₹120 प्रति औंस तक पहुंचाईं, लेकिन ओवरएक्सटेंडेड पोजीशन से प्रॉफिट बुकिंग और लिक्विडेशन शुरू हुआ।
मार्जिन कॉल्स और सेल-ऑफ — टेक स्टॉक्स में गिरावट और AI से जुड़ी चिंताओं से ब्रॉड मार्केट सेल-ऑफ हुआ, जिसने चांदी पर अतिरिक्त दबाव डाला।
भारत में स्थिति
भारत में चांदी की कीमतें MCX फ्यूचर्स और लोकल स्पॉट मार्केट से प्रभावित होती हैं। रिटेल निवेशक और ज्वेलरी सेक्टर में मांग अभी भी मजबूत है, लेकिन हाई प्राइस से खरीदारी घटी है। फरवरी में तीन दिनों में ही ₹27,000 प्रति किलो की गिरावट आई है।
कीमतों की तुलना (प्रति किलोग्राम)
| तारीख/पीरियड | कीमत (₹) | बदलाव |
|---|---|---|
| जनवरी 2026 पीक | 4,00,000 | – |
| 1 फरवरी 2026 | 3,50,000 | – |
| 15 फरवरी 2026 | 2,75,000 | -21% (फरवरी में) |
| 16 फरवरी 2026 (वर्तमान) | 2,36,000-2,68,000 | -3.3% (दिन में) |
आगे क्या?
एक्सपर्ट्स का मानना है कि चांदी की कीमतें अभी ओवरवैल्यूड थीं, इसलिए सुधार जरूरी था। 2026 में औसत $81 प्रति औंस (लगभग ₹2.5-2.8 लाख प्रति किलो भारतीय बाजार में) रहने की उम्मीद है, लेकिन इंडिया और चीन से रिटेल डिमांड और इंडस्ट्रियल रिकवरी पर निर्भर करेगा। निवेशकों को सतर्क रहना चाहिए, क्योंकि अस्थिरता बनी रहेगी। लंबी अवधि में सोलर और ग्रीन एनर्जी से डिमांड बढ़ सकती है।
Disclaimer: यह समाचार और बाजार विश्लेषण वर्तमान ट्रेंड्स पर आधारित है। निवेश से पहले विशेषज्ञ सलाह लें।