“अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के व्यापक ग्लोबल टैरिफ को अवैध घोषित कर दिया है, जिससे ट्रंप बेहद नाराज हैं। उन्होंने फैसले को ‘शर्मनाक’ और ‘disgrace’ बताया, कुछ जजों पर ‘ashamed’ होने का आरोप लगाया। ट्रंप ने तुरंत 10% ग्लोबल टैरिफ लागू करने का ऐलान किया और कहा कि उनका बैकअप प्लान तैयार है, जो ट्रेड एक्ट 1974 के तहत लागू होगा। यह फैसला ट्रंप की आर्थिक नीति को बड़ा झटका है, लेकिन वे वैकल्पिक रास्तों से टैरिफ जारी रखने पर अड़े हैं।”
टैरिफ पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले से भड़के ट्रंप, बताया शर्मनाक, कहा- तैयार है मेरा प्लान B
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को एक ऐतिहासिक 6-3 फैसले में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए व्यापक ग्लोबल टैरिफ को गैरकानूनी करार दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) के तहत राष्ट्रपति को टैरिफ लगाने की शक्ति नहीं है। चीफ जस्टिस जॉन रॉबर्ट्स की अगुवाई वाली बेंच ने कहा कि कांग्रेस के बिना राष्ट्रपति असीमित आयात शुल्क नहीं लगा सकते। इस फैसले से ट्रंप प्रशासन के 2025 में लगाए गए अधिकांश टैरिफ प्रभावित हुए हैं।
ट्रंप ने इस फैसले पर तीखी प्रतिक्रिया दी। व्हाइट हाउस में गवर्नर्स के साथ बैठक के दौरान उन्हें खबर मिली तो उन्होंने इसे “disgrace” और “शर्मनाक” बताया। उन्होंने कुछ जस्टिसों पर निशाना साधते हुए कहा, “मैं कोर्ट के कुछ सदस्यों पर ashamed हूं, वे देश के लिए सही करने की हिम्मत नहीं दिखा सके।” ट्रंप ने यहां तक कहा कि फैसला “unpatriotic” और “disloyal to our Constitution” है। उन्होंने अपनी नियुक्ति वाले कुछ जस्टिसों जैसे Amy Coney Barrett और Neil Gorsuch को भी निशाने पर लिया, उन्हें “fools and lapdogs” कहा।
फैसले के कुछ घंटों बाद ही ट्रंप ने Truth Social पर पोस्ट कर 10% ग्लोबल टैरिफ लागू करने की घोषणा की। यह टैरिफ ट्रेड एक्ट 1974 की धारा के तहत लगाया गया है और 150 दिनों के लिए प्रभावी होगा। ट्रंप ने लिखा, “यह मेरे लिए great honor है कि मैंने Oval Office से सभी देशों पर 10% ग्लोबल टैरिफ साइन किया है, जो almost immediately प्रभावी होगा।” प्रशासन ने स्पष्ट किया कि यह टैरिफ कुछ खाद्य उत्पादों, क्रिटिकल मिनरल्स और पहले से अलग टैरिफ वाले सामानों पर लागू नहीं होगा।
यह फैसला ट्रंप की “America First” नीति के लिए बड़ा setback है। IEEPA के तहत लगाए गए टैरिफ से 2025 में 175 अरब डॉलर से अधिक राजस्व जुटाया गया था। Penn-Wharton Budget Model के अनुसार, अब कंपनियां 175 अरब डॉलर से ज्यादा के रिफंड की मांग कर सकती हैं। कोर्ट ने मामले को United States Court of International Trade में वापस भेज दिया है, जहां रिफंड और अन्य मुद्दों पर सुनवाई होगी।
ट्रंप ने कहा कि उनका “Plan B” तैयार है। प्रशासन अन्य कानूनी प्रावधानों जैसे Section 232 (national security) और Section 301 (unfair trade practices) का इस्तेमाल कर टैरिफ जारी रख सकता है। ट्रेजरी सेक्रेटरी ने संकेत दिया कि वैकल्पिक रास्तों से टैरिफ को मजबूत किया जाएगा। ट्रंप ने दावा किया कि यह फैसला उनकी ट्रेड डील्स को प्रभावित नहीं करेगा, खासकर भारत सहित कई देशों के साथ।
वैश्विक बाजारों में हलचल मची है। फैसले के बाद यूरोपीय स्टॉक मार्केट में तेजी आई, लेकिन अमेरिकी मार्केट में अनिश्चितता बनी हुई है। भारत पर असर सीमित रह सकता है क्योंकि ट्रंप ने “India Deal” को सुरक्षित बताया है। हालांकि, 10% ग्लोबल टैरिफ से भारतीय निर्यात जैसे टेक्सटाइल, फार्मा और इलेक्ट्रॉनिक्स प्रभावित हो सकते हैं।
ट्रंप ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि कोर्ट का फैसला “terrible” है और वे इसे चुनौती देंगे। उन्होंने dissent करने वाले जस्टिस Thomas, Alito और Kavanaugh का शुक्रिया अदा किया। यह घटनाक्रम अमेरिकी राजनीति में एग्जीक्यूटिव पावर की सीमाओं पर नई बहस छेड़ सकता है।
Disclaimer: यह खबर विभिन्न विश्वसनीय रिपोर्ट्स पर आधारित है। इसमें व्यक्तिगत राय शामिल नहीं है।